नमस्ते मेरे प्यारे बच्चों। मैं हूं सुषमा रावत, और यह है दादी की कहानियों वाली रात। आज दीया थोड़ा ज्यादा कांप रहा है, क्योंकि आज की कहानी पहाड़ों से आई है, ठंडी हवा के साथ। यह कहानी मुझे मेरी अपनी दादी ने सुनाई थी, अल्मोड़ा के हमारे पुराने घर में, जब मैं तुम्हारे जितनी छोटी थी। पहाड़ों में एक छोटी सी भूरी चिड़िया होती है, जिसे घुघुती कहते हैं। वह सुबह-सुबह बहुत मीठा बोलती है। एक दिन उस घुघुती को खेत में कुछ चमकता हुआ मिला। एक दाना। लेकिन मंडुवे का नहीं, सोने का। अब सोचो, पूरे गांव को पता चल गया। लोहार आया, पंडित आया, पटवारी आया। सबको वह दाना चाहिए था। घुघुती ने क्या किया? यह मैं तुम्हें अभी नहीं बताऊंगी। कंबल ठीक करो, लंबी सांस लो, और चलो पहाड़ पर। आप सुन रहे हैं Witspeak Podcasts पर, और कहानी अब शुरू होती है।