नमस्ते बच्चों, और नमस्ते उन सबको जो बच्चों को सुला रहे हैं। मैं हूं सुषमा रावत, और यह है दादी की कहानियों वाली रात। दीया जल गया है, बाहर झींगुर बोल रहे हैं, और मेरी चौकी पर आज एक बहुत पुरानी कहानी बैठी है। यह कहानी पंचतंत्र से आई है, करीब दो हजार साल पहले लिखी गई थी, और आज भी उतनी ही मजेदार है। एक जंगल था, उस जंगल में एक शेर था, और उस शेर को बहुत घमंड था। जंगल के सारे जानवर उससे डरते थे। सारे, सिवाय एक छोटे से खरगोश के। उस खरगोश के पास ताकत नहीं थी, लेकिन उसके पास एक तरकीब थी, और एक कुआं। क्या होगा जब शेर कुएं में झांकेगा? कंबल ओढ़ लो, आंखें बंद करो, और मेरे साथ चलो जंगल की ओर। आप सुन रहे हैं Witspeak Podcasts पर, जहां हर रात एक कहानी आपका इंतजार करती है।