बेटा, ऑफिस कैसा था (Beta, How Was the Office) artwork

शुक्रवार शाम 6 बजे का छोटा सा काम

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शुक्रवार शाम 6 बजे का छोटा सा काम

हर ऑफिस में एक मैनेजर होता है जिसकी घड़ी शुक्रवार शाम 5:58 पर रुक जाती है। कबीर उस छोटे से काम की पूरी शारीरिक रचना समझाते हैं, जो कभी छोटा नहीं होता।

  • छोटा सा काम के चार चरण: मैसेज, कॉल, एक्सेल शीट, और सोमवार की मीटिंग
  • मम्मी का 6:05 वाला सवाल और उसके पीछे की राजनीति
  • श्रोता का वॉइस नोट: एक बंदा जिसने लैपटॉप शादी के मंडप में खोला
  • पापा की राय कि सरकारी नौकरी में ऐसा नहीं होता, जो गलत है
  • कबीर का असली जवाब जो उसने कभी भेजा नहीं

अपना छोटा सा काम वॉइस नोट में भेजिए, हम उसे बड़ा बना देंगे।

Transcript
नमस्ते, कैसे हैं आप सब। मैं हूं कबीर तनेजा और ये है बेटा, ऑफिस कैसा था, वो शो जो उसी सवाल से शुरू होता है जो मेरी मम्मी रोज़ रात को पूछती हैं, और जिसका जवाब आज तक मैंने ईमानदारी से नहीं दिया। आज की कहानी है शुक्रवार शाम 6 बजे की। आप बैग उठा चुके हैं, कुर्सी अंदर कर चुके हैं, और तभी मैसेज आता है। बस एक छोटा सा काम है। छोटा। सा। काम। दोस्तों, आज तक दुनिया में कोई छोटा सा काम हुआ ही नहीं है, ये एक कहानी है जो मैनेजर एक दूसरे को सुनाते हैं। आज हम इस छोटे से काम के चारों चरण देखेंगे, मम्मी का 6:05 वाला सवाल भी देखेंगे, और एक श्रोता की कहानी सुनेंगे जिसने लैपटॉप शादी के मंडप में खोल लिया। मेट्रो में जगह पकड़ लीजिए। आप सुन रहे हैं Witspeak Podcasts पर!
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